आरक्षण
आज निवेदन कर रहा नरेंद्र से, विकल सवर्ण सब सहकर। कितनी रक्त -रंजित अश्रु धाराएं, और गिरायेगा इन आखों से बह कर। बोलो - हे नरेंद्र तू ही तो इस कृत का नामी है…
3 essays in Poetry.
आज निवेदन कर रहा नरेंद्र से, विकल सवर्ण सब सहकर। कितनी रक्त -रंजित अश्रु धाराएं, और गिरायेगा इन आखों से बह कर। बोलो - हे नरेंद्र तू ही तो इस कृत का नामी है…
A short poem for the evening the monsoon finally arrives.